कविता
अभी रुको
अभी रुको
अभी रेत के ढेर पर नन्हे हाथ हवा में कोई आकार बाँध रहे हैं
अभी घूमते हुए चाक पर मिट्टी-पानी से बन रहा है कुछ सहेज कर रखने के लिए
अभी सितार के तारों को कसा जा रहा है सही स्वर की तरफ़
अभी घर से कोई निकलने को है एक इरादे के साथ
अभी रुको
अभी हमारे दौर का यह सबसे जरुरी समय है
कुछ रचे जाने के पहले का समय।
- राग तेलंग
प्रतिक्रिया दें
Labels: कविता


12 Comments:
bahut acchi kavita. badhai - rakesh, jabalpr
बहुत अच्छे .......
हिंदी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है .........
ब्लोगिंग जगत में स्वागत है
लगातार लिखते रहने के लिए शुभकामनाएं
सुन्दर रचना के लिए बधाई
कविता,गज़ल और शेर के लिए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
http://www.rachanabharti.blogspot.com
कहानी,लघुकथा एंव लेखों के लिए मेरे दूसरे ब्लोग् पर स्वागत है
http://www.swapnil98.blogspot.com
रेखा चित्र एंव आर्ट के लिए देखें
http://chitrasansar.blogspot.com
बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
kuch khas hai is me wah bhot tarif sir ji ko
हिंदी ब्लॉग की दुनिया में आपका स्वागत करता हूँ...
SWAGAT HAI >>>>
wah kya kahane, narayan narayan
सुन्दर एवं भावपूर्ण अभिव्यक्ति......बधाई
वह राग जी, आप तो भोपाल से हैं भोपाल में एक ब्लोगर मीत होने वाली है ,
मीट में शामिल होने के लिए यहाँ रजिस्टर कराएं ।
http://www.indiblogger.in/bloggermeet.php?id=34
हिन्दी ब्लॉग परिवार में आपका स्वागत है ,अपनी लेखनी से हिन्दी में योगदान दें ।
किसी प्रकार की कोई सहायता जगत के लिए पूरे ब्लॉग जगत से निसंकोच प्रश्न करें ,
धन्यवाद
अपनी अपनी डगर
My poems are my footsteps, they are my shadow in the dark also..... nice thinking...keep on ...
सुन्दर अभिव्यक्ति है, सुन्दर कल्पना हो, अभी रुको........
Post a Comment
Subscribe to Post Comments [Atom]
<< Home