Saturday, March 7, 2009

कविता

अभी रुको

अभी रुको

अभी रेत के ढेर पर नन्हे हाथ हवा में कोई आकार बाँध रहे हैं

अभी घूमते हुए चाक पर मिट्टी-पानी से बन रहा है कुछ सहेज कर रखने के लिए

अभी सितार के तारों को कसा जा रहा है सही स्वर की तरफ़

अभी घर से कोई निकलने को है एक इरादे के साथ

अभी रुको

अभी हमारे दौर का यह सबसे जरुरी समय है

कुछ रचे जाने के पहले का समय।

- राग तेलंग

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12 Comments:

At March 8, 2009 12:28 AM , Blogger raag telang said...

bahut acchi kavita. badhai - rakesh, jabalpr

 
At March 23, 2009 9:21 AM , Blogger AAKASH RAJ said...

बहुत अच्छे .......
हिंदी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है .........

 
At March 23, 2009 9:45 AM , Blogger रचना गौड़ ’भारती’ said...

ब्लोगिंग जगत में स्वागत है
लगातार लिखते रहने के लि‌ए शुभकामना‌एं
सुन्दर रचना के लि‌ए बधा‌ई
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
http://www.rachanabharti.blogspot.com
कहानी,लघुकथा एंव लेखों के लि‌ए मेरे दूसरे ब्लोग् पर स्वागत है
http://www.swapnil98.blogspot.com
रेखा चित्र एंव आर्ट के लि‌ए देखें
http://chitrasansar.blogspot.com

 
At March 23, 2009 12:17 PM , Blogger संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

 
At March 23, 2009 12:41 PM , Blogger Deepak "बेदिल" said...

kuch khas hai is me wah bhot tarif sir ji ko

 
At March 23, 2009 9:42 PM , Blogger दिल दुखता है... said...

हिंदी ब्लॉग की दुनिया में आपका स्वागत करता हूँ...

 
At March 23, 2009 10:17 PM , Blogger Vivek Ranjan Shrivastava said...

SWAGAT HAI >>>>

 
At March 23, 2009 10:26 PM , Blogger नारदमुनि said...

wah kya kahane, narayan narayan

 
At March 23, 2009 11:32 PM , Blogger Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

सुन्दर एवं भावपूर्ण अभिव्यक्ति......बधाई

 
At March 23, 2009 11:57 PM , Blogger MAYUR said...

वह राग जी, आप तो भोपाल से हैं भोपाल में एक ब्लोगर मीत होने वाली है ,
मीट में शामिल होने के लिए यहाँ रजिस्टर कराएं ।
http://www.indiblogger.in/bloggermeet.php?id=34


हिन्दी ब्लॉग परिवार में आपका स्वागत है ,अपनी लेखनी से हिन्दी में योगदान दें ।

किसी प्रकार की कोई सहायता जगत के लिए पूरे ब्लॉग जगत से निसंकोच प्रश्न करें ,

धन्यवाद
अपनी अपनी डगर

 
At March 24, 2009 3:10 AM , Blogger mark rai said...

My poems are my footsteps, they are my shadow in the dark also..... nice thinking...keep on ...

 
At March 24, 2009 6:50 AM , Blogger दिगम्बर नासवा said...

सुन्दर अभिव्यक्ति है, सुन्दर कल्पना हो, अभी रुको........

 

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